उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अपडेट सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए सहायक अध्यापक टीजीटी (कला) भर्ती 2024 में बीएड (B.Ed.) की डिग्री को अनिवार्य बताया है। कोर्ट के इस निर्णय ने राज्य सरकार के दशकों पुराने भर्ती नियमों और राष्ट्रीय मानक के बीच उम्मीदवारों की उलझन को बढ़ा दिया है।
यह मामला न केवल हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और NCTE Guidelines के अनुपालन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या है विवाद?
उत्तर प्रदेश में टीजीटी कला (TGT Art) के लिए योग्यता का आधार इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 रहा है। इस पुराने नियम के अनुसार, यदि किसी छात्र ने 'प्राविधिक कला' (Technical Art) के साथ इंटर और स्नातक किया है, तो वह बिना बीएड के भी शिक्षक बनने के योग्य था।
हालांकि, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने 12 नवंबर 2014 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) पर पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए स्नातक/स्नातकोत्तर में 50% अंकों के साथ बीएड अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी हालिया विज्ञापन में बीएड को 'अनिवार्य' के बजाय केवल 'वरीयता' (Preference) दी गई थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट का रुख: नियुक्तियों पर अंतरिम रोक
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने विनोद कुमार यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब एक राष्ट्रीय संस्था (NCTE) ने मानक तय कर दिए हैं, तो राज्य सरकार उससे इतर नियम कैसे बना सकती है।
कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु:
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बीएड अनिवार्य: प्रथम दृष्टया बीएड को अनिवार्य योग्यता माना गया है।
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नियुक्ति पर रोक: जिन अभ्यर्थियों के पास बीएड की डिग्री नहीं है, उनके चयन और नियुक्ति पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी गई है।
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सरकार से जवाब तलब: महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर 13 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
हाईकोर्ट के आदेश का विवरण निम्नलिखित है:
केस का शीर्षक: विनोद कुमार यादव व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (Vinod Kumar Yadav and Others vs State of U.P.)
रिट याचिका संख्या (Writ A No.): 1573 of 2024 (तथा इससे सम्बद्ध अन्य याचिकाएं)
आधिकारिक संदर्भ: आप NCTE Regulation 2014 PDF और न्यूनतम योग्यता संबंधी आधिकारिक अधिसूचना देख सकते हैं
इस कानूनी मोड़ का सीधा असर उत्तर प्रदेश के शिक्षक भर्ती ईकोसिस्टम पर पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक:
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प्रभावित अभ्यर्थी (नुकसान): उत्तर प्रदेश में ऐसे अभ्यर्थी हैं जो केवल 'प्राविधिक कला', 'बॉम्बे आर्ट' या 'BFA' के आधार पर टीजीटी कला की तैयारी करते हैं। यदि बीएड अनिवार्य होता है, तो इनका आवेदन अमान्य हो सकता है।
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बीएड धारकों को लाभ: इस फैसले से उन बीएड डिग्री धारकों को सीधा फायदा होगा जो कला विषय से स्नातक हैं। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी आएगी और केवल वही लोग शिक्षक बन पाएंगे जिन्होंने प्रोफेशनल टीचिंग ट्रेनिंग ली है।
कंप्यूटर शिक्षक भर्ती हाल
गौरतलब है कि इसी तरह का मामला सहायक अध्यापक (कंप्यूटर) पदों के लिए भी चल रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 28 मार्च को गजट जारी कर बीएड से छूट दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने 12 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि NCTE नियमों के उल्लंघन वाली नियमावली विधि की दृष्टि में टिक नहीं सकती। कंप्यूटर शिक्षक के 1,056 पदों के लिए आवेदन करने वाले 70,496 अभ्यर्थियों का भविष्य भी अब बीएड की अनिवार्यता पर टिका है।
महत्वपूर्ण जानकारी
यदि आप टीजीटी कला भर्ती के अभ्यर्थी हैं, तो:
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प्राविधिक कला (Technical Art): यह अब तक यूपी में 'शॉर्टकट' योग्यता मानी जाती थी, लेकिन अब बीएड के बिना इसका महत्व संकट में है।
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NCTE vs State Rules: भारतीय संविधान के अनुसार, शिक्षा समवर्ती सूची में है, लेकिन शिक्षक प्रशिक्षण के मामले में केंद्रीय संस्था (NCTE) के नियम राज्यों पर भारी पड़ते हैं।
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अनिवार्य योग्यता (Essential Qualification): इसका मतलब है कि फॉर्म भरने के लिए बीएड डिग्री का होना "मस्ट" है।
निष्कर्ष
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य के शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है। जहां एक तरफ वर्षों से तैयारी कर रहे 'प्राविधिक कला' वाले छात्र निराश हैं, वहीं बीएड धारक इसे न्याय की जीत मान रहे हैं।
अगली सुनवाई 13 मार्च को होनी है, जिसमें सरकार यह स्पष्ट करेगी कि उसने विज्ञापन में बीएड को अनिवार्य क्यों नहीं किया था। अभ्यर्थी अफवाह से बचने के लिए UPSC और NCTE की आधिकारिक वेबसाइट जाकर नए अपडेट जरूर देखें।
Disclaimer: यह ब्लॉग पोस्ट सार्वजनिक सूचनाओं और ऑनलाइन डेटा के आधार पर लिखा गया है और सिर्फ़ जानकारी उदेश्य के लिए है।

